"मुझे किसी इंसान से कोई शिकायत नहीं…
मुझे शिकायत है समाज के उस ढाँचे से,
जो इंसान से उसकी इंसानियत छीन लेता है, मतलब के लिए अपने भाई को बेगाना बनाता है, दोस्त को दुशमन बनाता है…
मुझे शिकायत है उस तहज़ीब से,
उस संस्कृति से…
जहाँ मुर्दों को पूजा जाता है और जिंदा इंसान को पैरों तले रौंदा जाता है…
जहाँ किसी के दुःख-दर्द में दो आँसू बहाना बुज़दिली समझा जाता है,
झुक के मिलना एक कमजोरी समझा जाता है…
ऐसे माहौल में मुझे कभी शांति नहीं मिलेगी, मीना!
कभी शांति नहीं मिलेगी, इसलिए मैं दूर जा रहा हूँ!”
ABSOLUTE CINEMA!! POETIC!!
"मुझे किसी इंसान से कोई शिकायत नहीं…
मुझे शिकायत है समाज के उस ढाँचे से,
जो इंसान से उसकी इंसानियत छीन लेता है, मतलब के लिए अपने भाई को बेगाना बनाता है, दोस्त को दुशमन बनाता है…
मुझे शिकायत है उस तहज़ीब से,
उस संस्कृति से…
जहाँ मुर्दों को पूजा जाता है और जिंदा इंसान को पैरों तले रौंदा जाता है…
जहाँ किसी के दुःख-दर्द में दो आँसू बहाना बुज़दिली समझा जाता है,
झुक के मिलना एक कमजोरी समझा जाता है…
ऐसे माहौल में मुझे कभी शांति नहीं मिलेगी, मीना!
कभी शांति नहीं मिलेगी, इसलिए मैं दूर जा रहा हूँ!”
ABSOLUTE CINEMA!! POETIC!!